#Muawiya_Zafar_Gazali_Mustafai

माहें रजब मुकद्दसा
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لسلام علیکم ورحمتہ اللہ وبرکاتہ.....
بِسْــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ!!
*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰهﷺ*🌹
लैंखक व तालिबे दुआए शहादत:~फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी {टी.टी.एस.अमरौहा शाह:07417474441}

माहें रजब मुकद्दसा
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रजब दर असल तरजिब से यानि निकला हैं इसके हकीकी माना हैं ताज़ीम करना इसको अल असब यानि सब से तेज़ बहाव भी कहते हैं इस लिये इस माहे मुबारका में तौबा करने वालो पर रहमत का बहाव तेज़ हो जाता हैं और ईबादत करने वालो पर क़बूलिय्यत के अन्वार का फैजान ए ख़ास होता हैं।

इस माह ए मुबारका को अल असम्म यानि खूब बहरा भी कहते हैं क्यूकी इसमें जंगो और बदलों की आवाज़ बिलकुल सुनाई नहीं देती और इसे रजब इसलिए कहा जाता हैं कि जन्नत की एक नहर का नाम रजब हैं जिस का पानी दूध से ज्यादा सफैद शहद से ज्यादा मीठा और बर्फ से ज्यादा ठंडा हैं रिवायतों के मुताबिक़ इस नहर से वोही शख्स पानी पियेगा जो रजब मुबारका के महीने में रोज़े रखेगा बाकी अल्लाह रब्बुलइज्ज़त जिसे चाहें।

{हवाला:रजब की बहारें सफाह:03}
{हवाला:अल तहकीक ए ग़ज़ाली मुस्ताफाई}
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*اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَ اللّٰهﷺ*🌹
*लेखक व तालिबे दुआ ए शहादत~•
✒️ *वाबस्ता आस्ताना ए आलाहज़रत रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा टी.टी.एस बरेली शरीफ {पीरो मुर्शीद बद्दरूशरिया हुज़ूर मुफ्ती अहसन मिया साहब क़िब्ला सज्जादानशीन आस्ताना ए सरकार आलाहजरत रज़ीअल्लाहु तआला अन्हुमा}*– *गुलाम ए अली अबू तुरआब फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी*{7417474441}

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