#Muawiya_Zafar_Gazali_Mustafai

“ रद्द-ए-शदीद फितनाए सुलहकुल्लियत 01 ”
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بِسْــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
قُلۡ هُوَ اللّٰهُ اَحَدٌ‌ۚ‏ اللّٰهُ الصَّمَدُ‌ۚ‏ لَمۡ يَلِدۡ وَلَمۡ يُوۡلَدۡۙ‏ وَلَمۡ يَكُنۡ لَّهٗ كُفُوًا اَحَدٌ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَاللّٰهﷺ
लैंख़क वा तालिबे दुआ-ए-शहादत - फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी (टी.टी.एस.अमरौहा शाह:07417474441)

“ रद्द-ए-शदीद फितनाए सुलहकुल्लियत 01 ”
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⚘ हमारा दर्स-ए-हक़िकी की कौम-ए-मुस्लिमा के वो मुनाफ़िकीन अफ़राद जो कलमा‌‌ तो अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ ओ उसके रसूलﷺ का पड़ते हैं मगर उन्हीं के दुश्मनो यानी काफ़िरो वा मुश्रिको के साथ ताल्लुक़ रखते हैं उनकी महफ़िलात वा जश्नों में शरीक होते हैं ऐसे अवराद महज़ कौम-ए-मुस्लिमा के गलीज़ मुनाफ़िक के सिवा कुछ नहीं है और फिर उस पर उन गलीज़ मुनाफ़िकीन का ज़ुल्म-ए-शदीद देखें की ऐसा अमल-ए-बागी अंजाम देने के बाद उनकी वज़ाहत यही हैं कि मिल्लतदारी ताल्लुक़ात और अख़्लाक को निभाना पड़ता हैं दुनियादारी भी कोई चीज़ हैं ख़बरदार गलीज़ मुनाफ़िको तुम किस मिल्लतदारी ताल्लुक़ात और किस अख़्लाक वा दुनियादारी को निभाने की बात वा अमल करते हो औह ज़ालिमों सुनलो और याद रखो की दीन-ए-तौहीद और ख़ुद फ़कीर-ए-क़ादरी इस तरह की तुम्हारी किसी भी मिल्लतदारी ताल्लुक़ात और अख़्लाक वा दुनियादारी को निभाने की बात वा अमल पर थूकता भी नहीं हैं इंशाअल्लाह आख़िरी पैग़ाम की तुम गलीज़ मुनाफ़िकीन का ज़र्रा बराबर भी कोई ताल्लुक़ अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ ओ उसके रसूलﷺ यानी दीन-ए-तौहीद से कतई नहीं हैं अब रहा मसअला इन गलीज़ मुनाफ़िकीन के हमदर्द अफ़रादो का जिनका मौक़िफ ऐसे गलीज़ मुनाफ़िकीन के लिए दुआ-ए-हिदायत का हैं तो‌ वो इल्म से आशना पर निहायत जाहिल अफ़राद बा ग़ौर ज़हन नशीन रखें दुआ-ए-हिदायत किसी मसअले पर गुमराह के लिए की जाती हैं मगर दीन-ए-तौहीद का हर मसअला शफ़्फाक और रौशन हैं पर नसीहत हासिल करने वालो के लिए फिर भी कोई मसअला समझ ना आए तो दीन-ए-तौहीद के चंद पर हक़िकी आलिम वा आमिल मौजूद-ए-दुनिया हैं उनसे राब्ता क़ायम करें और सदा उनके राब्ते में मौजूद रहें…

⚘ मेरे ईमाम औलाद-ए-आलाहज़रत अलैहिर्रहमा शैख़-उल-आहादीस मुफ्ती-ए-आज़म वा काज़ी-ए-हिंद पीरे तरीक़त रहबरे सुन्नियत आरिफ़-ए-बिल्लाह फिल वक्त मुजद्दीदे दौरा क़ाईद-ए-मिल्लत सरकार ईमामें ज़मा सरकार ताजुश्शरिया हज़रते अल्लामा वा मौलाना अलहाज अश्शैख़ मुहम्मद इस्माईल अख़्तर रज़ा खां नूरी क़ादरी बरकाती अलैहिर्रहमा वा रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन ख़ुद‌ अपनी ज़ुबान-ए-हक़ ईरशाद फरमाते हैं की -

ज़िन्दगी ये नहीं हैं किसी के लिए 
ज़िन्दगी है नबीﷺ की नबीﷺ के लिए,

मसलके आलाहज़रत सलामत रहे
एक पहचान हैं दीन-ए-नबीﷺ के लिए,

मसलके आलाहज़रत पे कायम रहो
ज़िन्दगी दी गई हैं इसी के लिए,

सुल्हकुल्ली नबीﷺ का नहीं सुन्नियों
सुन्नी मुस्लिम है सच्चा नबीﷺ के लिए,

अख़्तर-ए-क़ादरी ख़ुल्द में चल दिया
ख़ुल्द वा हैं हर एक क़ादरी के लिए॥

⚘ अलहम्दुलिल्लाह उम्मीद-ए-कामिल हैं की उन गलीज़ मुनाफ़िको तक हमारा ये पैग़ाम बा आसानी पोहोच गया होगा बस वो गलीज़ मुनाफ़िकीन अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ का बैपनाह शुक्र अदा करे की उनका नाम इस तहरीर में साफ तहरीर नहीं किया गया वो गलीज़ मुनाफ़िकीन कतई इस गुमान में ना रहे की वो हमारे अज़ीज़ वा मौहतरम हैं तो उनका लिहाज़ किया जाएगा क्यूंकि गालिबन वो भूल गए हैं की फ़कीर-ए-क़ादरी के लिए फक्त हक़िकी अज़ीज़ वा मौहतरम अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ ओ उसके रसूलﷺ की जात-ए-मुबारका हैं बाकी वो गलीज़ मुनाफ़िकीन अपने इस अमल-ए-बागी से बाज ना आए तो फ़कीर-ए-क़ादरी उनका मुकम्मल रद्द-ए-शदीद करेगा इंशाअल्लाह बस अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ‌ से उसकी रहमत के साथ सुवाल हैं की वो हमारी सुलहकुल्लियत से हिफ़ाज़त फरमाए और हमे सुलहकुल्लियत का रद्द-ए-शदीद करने वाली जमात में हक़िकी शामिल वा कामिल फरमाए बाकी वल्लाहउल आलम॥
مَنْ سَبَّ نَبِيًّا فَاقْتُلُوهُ 
وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِين
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ ادْخُلُواْ فِي السِّلْمِ كَآفَّةً وَلاَ تَتَّبِعُواْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
فَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَاللّٰهﷺ
(हवाला:अल तहक़ीक-ए-ग़ज़ाली मुस्ताफाई)
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लैंख़क वा तालिबे दुआ-ए-शहादत –
✒️ वाबस्ता आस्ताना-ए-आलाहज़रत रज़िअल्लाहु ताआला अन्हुम टी.टी.एस बरेली शरीफ (पीरो मुर्शीद बद्दरूशरिया हुज़ूर मुफ्ती अहसन मिया साहब क़िब्ला सज्जादानशीन आस्ताना-ए-सरकार ईमाम आलाहज़रत रज़िअल्लाहु ताआला अन्हुम) -‌ गुलाम-ए-अली अबू तुरआब फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी (टी.टी.एस.अमरौहा शाह:07417474441)

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