#Muawiya_Zafar_Gazali_Mustafai
“ ख़त्म-ए-नुबुव्वत वा रिसालतﷺ ”
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بِسْــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــــمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِىْمِ
قُلۡ هُوَ اللّٰهُ اَحَدٌۚ اللّٰهُ الصَّمَدُۚ لَمۡ يَلِدۡ وَلَمۡ يُوۡلَدۡۙ وَلَمۡ يَكُنۡ لَّهٗ كُفُوًا اَحَدٌ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَاللّٰهﷺ
लैख़क वा तालिबे दुआ-ए-शहादत - फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी (टी.टी.एस.अमरौहा शाह:07417474441)
“ ख़त्म-ए-नुबुव्वत वा रिसालतﷺ ”
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कादयानियत वा तमाम फितना-ए-मुर्तादीन का मुकम्मल तहक़िकी और इल्मी रद्द-ए-शदीद ≈
⚘ अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ इरशाद फरमाता हैं कि हज़रते सैय्यदना महबूबﷺ तुम्हारे मर्दों में से किसी के वालिद नहीं लेकिन अल्लाहﷻ के रसूल और आख़िरी नबी हैं और अल्लाहﷻ सब चीज़ों को जानने वाला हैं॥
{हवाला:अल कुरआन तर्जुमा:कंजुल ईमान सुरह:अल अहज़ाब आयत-ए-मुबारका:40}
⚘ हज़रते सैय्यद उक़बा इब्ने आमिर रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने इरशाद फरमाया कि अगर मेरे बाद कोई नबी होता तो हज़रते सैय्यदना उमर इब्ने खत्ताब रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन होते मगर मेरे बाद कोई नबी नहीं॥
{हवाला:सहिह सुन्ना तिरमिज़ी शरीफ़ आहादीस शरीफ़:3686 आहादीस शरीफ़:4050 जिल्द:06 सफहा:364 किताबउल मनाकिब}
⚘ हज़रते सैय्यदना सआ़द बिन अबी वक्कास रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने अमीरूल मौमिनीन सैय्यदना मौला अली रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से गज़वा-ए-तबूक के मौक़े पर इरशाद फरमाया तुम्हारी मेरेﷺ साथ वही मंजिलत हैं जो सैय्यदना हारून अलैहिस्सलाम को सैय्यदना मूसा अलैहिस्सलाम से थी मगर हाँ मेरे बाद कोई नबी नहीं।
{हवाला:सहिह बुखारी शरीफ़ आहादीस शरीफ़:3706}
{हवाला:सहिह मुस्लिम शरीफ़ आहादीस शरीफ़:6217 आहादीस शरीफ़:2404 जिल्द:06 सफहा:261 बाब:44 फज़ाइल-ए-अली इब्ने अबू तालिब}
{हवाला:सहिह बुखारी शरीफ़ आहादीस शरीफ़:4416 जिल्द:05 सफहा:424 बाब:64 किताबउल मगाज़ी बाब: गज़वा-ए-तबूक}
{हवाला:सहिह जामै तिरमिज़ी शरीफ़ जिल्द:06 सफाह:400 आहादीस शरीफ़:3731 आहादीस शरीफ़:4095}
⚘ हज़रते सैय्यदना सौबान रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने इरशाद फरमाया कि बैश्क अंकरीब मेरी उम्मत में तीस शख़्स झुटे पैदा होंगे जिनमें से हर एक शख़्स अपने मुत्तालिक यही कहेगा की वो नबी हैं हालांकि मैं मुहम्मदﷺ आख़िरी नबी हूँ मेरे बाद कोई नबी नहीं॥
{हवाला:सहिह जामै तिरमिज़ी शरीफ़ जिल्द:04 सफाह:270 किताबउल फितन आहादीस शरीफ़:2219}
⚘ हज़रते सैय्यदना अबू हुरैरा रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने इरशाद फरमाया कि कयामत उस वक्त तक ना आएगी जब तक मेरी उम्मत में तीस दज्जाल ना आ जाए उनमें से हर कोई नबी होने का दावा करेगा हालांकि मैं मुहम्मदﷺ आख़िरी नबी हूँ मेरे बाद कोई नबी नहीं॥
{हवाला:सहिह मुस्लिम शरीफ़ आहादीस शरीफ़:6217 आहादीस शरीफ़:7342 जिल्द:07 सफहा:317 बाब:किताबउल फितन}
{हवाला:सहिह सुन्ना अबू दाऊद शरीफ़ आहादीस शरीफ़:4333 आहादीस शरीफ़:4319 जिल्द:04 सफहा:535 किताबउल मालाहीम बाब:खबरे इब्ने साद}
⚘ हज़रते सैय्यदना अनस इब्ने मालिक रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने इरशाद फरमाया कि बैशक रिसालत और नुबुव्वत ख़त्म कर दी गई अब मेरे बाद कोई रसूल और नबी नहीं होगा॥
{हवाला:सहिह जामै तिरमिज़ी शरीफ़ जिल्द:04 सफहा:318 बाब:34 बाब-ए-ख़्वाब आहादीस:2272 आहादीस:2441}
⚘ हज़रते सैय्यदना बिन मुतिम से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने अपने कई अस्मा-ए-मुबारका बयान फरमाए की मैं मुहम्मदﷺ हूँ मैं अहमदﷺ हूँ मैं माहीﷺ हूँ जिसके ज़रिए से अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ ने कुफ्र को मिटाया और मैं हासिरﷺ हूँ जिसके हुज़ूर सब जमा किए जाएंगे और मैं अल आक़िबﷺ हूँ जिसके बाद कोई नबी नहीं होगा॥
{हवाला:सहिह बुखारी शरीफ़ आहादीस शरीफ़:3532 जिल्द:04 सफहा:453 किताबउल मनाकिब बाब: माजा फि अस्माउर रसूलअल्लाहﷺ}
{हवाला:सहिह बुखारी शरीफ़ आहादीस शरीफ़:4896 जिल्द:06 सफहा:348 किताबउत तफसीर}
{हवाला:सहिह मुस्लिम शरीफ़ आहादीस शरीफ़:6105 आहादीस शरीफ़:6106 जिल्द:06 सफहा:98-197 किताबउल फज़ाइल बाब:फि अस्मा अन नबी}
{हवाला:सहिह जामै तिरमिज़ी शरीफ़ जिल्द:05 सफहा:187 बाब:34 किताबउल अदब आहादीस शरीफ़:2840 आहादीस शरीफ़:3075}
{हवाला:ईमाम-ए-मालिक अल मुवत्ता बाब:61 अस्मा अन नबी आहादीस शरीफ़:1861}
{हवाला:ईमाम-ए-हाकिम तिरमिज़ी शरीफ़ बाब: शमाइल-ए-मुहम्मदिया जिल्द:01 सफाह:250 आहादीस शरीफ़:366}
⚘ हज़रते सैय्यदना अबू हुरैरा रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन से रिवायत हैं कि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ ने इरशाद फरमाया कि मेरी मिसाल और गुजिश्ता सैय्यदना अंबिया-ए-इकराम अलैहिससलाम की मिसाल ऐसी हैं जैसे किसी ने एक बोहोत ख़ूबसूरत महल बनाया और उसे ख़ूब आरस्ता किया लेकिन एक गौशे में एक ईंट की जगह छोड़ दी गई लोग आ कर उस महल को देखने लगे और इस पर ताज्जुब का इज़हार करते हुए कहने लगे इस गौशे पर ईंट क्यों नहीं रखी गई मेरे आका हुज़ूरﷺ ने इरशाद फरमाया में वही ईंट हूँ और मैं खातिमउन्नबीइन हूँ यानी मेरे बाद बाब-ए-नुबुव्वत हमेशा के लिए बन्द हो गया॥
{हवाला:सहिह बुखारी शरीफ़ जिल्द:04 सफाह:454 बाब:61 किताबउल मनाकाइब बाब:खातिमीन नबियीन आहादीस शरीफ़:3535}
{हवाला:सहिह मुस्लिम शरीफ़ जिल्द:06 बाब:43 किताबउल मनाकाइब बाब:ज़िक्र-ए-कावनी खातिमीन नबियीन आहादीस शरीफ़:5959 - 5964}
{हवाला:ईमाम नसाई सुन्नाह अल कुबरा जिल्द:06 सफाह:436 आहादीस शरीफ़:11422}
{हवाला:ईमाम अहमद मुसनद इब्ने हम्बल आहादीस शरीफ़:7278 - 7436 आहादीस शरीफ़:7917 - 8959 आहादीस शरीफ़:9132}
{हवाला:सहिह इब्ने हिब्बान आहादीस शरीफ़:6405}
{हवाला:सहिह ईमाम तब्रानी मुसनद अल शमीम आहादीस:130 - 3231}
{हवाला:सहिह ईमाम तब्रानी अल मजमाउल अल औसत आहादीस:3274}
{हवाला:ईमाम हमैदी अल मुसनद हमैदी जिल्द:01 सफहा:600 आहादीस:1067}
⚘ मेरे आक़ा हस्सान-उल-हिन्द शाह़का़रें नातﷺ ख़्वा ईमामें अहलेसुन्नत अल मुजद्दिद अल मुहद्दिस आलाहज़रत हुज़ूर मुहम्मद अहमद रज़ा खां फाज़िले बरेलवी रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन वा क़ुद्दुस सिर्रहू अज़ीज़ ईरशाद फरमाते हैं की -
मेहरे चर्खे नुबुव्वतﷺ पे रौशन दुरूद
गुले बागे रिसालतﷺ पे लाखों सलाम,
फ़तहे बाबे नुबुव्वतﷺ पे बैहद दुरूद
ख़त्में दौरे रिसालतﷺ पे लाखों सलाम,
हजरे असवदो काबा-ए-जानो दिल
यानी मौहरे नुबुव्वतﷺ पे लाखों सलाम,
काबा-ए-दीनो इमाँ के दोनों सुतून
साईदैने रिसालतﷺ पे लाखों सलाम,
मुझसे ख़िदमत के क़ुद्दसी कहें हाँ रज़ा
मुस्तफाﷺ जान-ए-रहमत पे लाखों सलाम॥
अपने तास्सुरात - तमाम तहरीरो हवालात का जुज़-ए-हकिकी यही हैं कि जब हज़रते सैय्यदना खुलाफा-ए-राशिदीन रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन वा दीगर मुबारक वा तैय्यब शख्सियात नबी वा रसूल नहीं हो सकती क्यूंकि आप सैय्यदउल मुरसलीन कासिम-ए-रिज़्कअल्लाह आकाओं मौला हुज़ूर मुहम्मदुर्रसूलुअल्लाह सल्लल्लाहो ताआला अलैहि वा आलैही वसल्लमﷺ सबसे अव्वल और आख़िरी नबी वा रसूल हैं तो फिर कैसे मुमकिन हैं की किसी दज्जाल के ऐलानो हवालात-ए-कज़्ज़ाबियत को काबिल-ए-कुबूल महज़ गुमान भी किया जाए या महज़ उसकी बात को सुना भी जाए गालिबन अल्लाह रब्बुलइज़्ज़तﷻ से यकीन-ए-कामिल हैं कि फ़कीर-ए-क़ादरी इस दौर-ए-हाज़िर के हर घर की जानिब बढ़ रहे इस फितना-ए-मुर्तादीन जो की कौम-ए-मुस्लिमा के लिए नासूर और बाईस-ए-नार वा बाईस-ए-ख़ारिजे ईमान बन गया हैं उसकी हक़ीक़त बयांँ कर सका होगा वल्लाहउलआलम क्यूंकि इससे ना आशना रहने वाले हज़रात जल्द बाईस-ए-नार और बाईस-ए-ख़ारिजे ईमान हो जाएंगे वमा अलईना इल्लबलाग़ वा आखिरूद दा़वाना अनिलहम्दुलिल्लाही रब्बिलआलामीन॥
مَنْ سَبَّ نَبِيًّا فَاقْتُلُوهُ
وَمَا أَرْسَلْنَاكَ إِلَّا رَحْمَةً لِلْعَالَمِين
يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُواْ ادْخُلُواْ فِي السِّلْمِ كَآفَّةً وَلاَ تَتَّبِعُواْ خُطُوَاتِ الشَّيْطَانِ إِنَّهُ لَكُمْ عَدُوٌّ مُّبِينٌ
أَلَا إِنَّ أَوْلِيَاءَ اللَّهِ لَا خَوْفٌ عَلَيْهِمْ وَلَا هُمْ يَحْزَنُونَ
فَبِأَيِّ آلاءِ رَبِّكُمَا تُكَذِّبَانِ
اَلصَّــلٰوةُ وَالسَّلَامُ عَلَيْكَ يَا رَسُوْلَاللّٰهﷺ
(हवाला:अल तहक़ीक-ए-ग़ज़ाली मुस्ताफाई)
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लैख़क वा तालिबे दुआ-ए-शहादत –
✒️ वाबस्ता आस्ताना-ए-आलाहज़रत रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन टी.टी.एस बरेली शरीफ (पीरो मुर्शीद बद्दरूशरिया हुज़ूर मुफ्ती अहसन मिया साहब क़िब्ला सज्जादानशीन आस्ताना-ए-सरकार ईमाम आलाहज़रत रदिअल्लाहु ताआला अन्हुम वा रदुअन) - गुलाम-ए-अली अबू तुरआब फ़कीर मुआविया ज़फ़र ग़ज़ाली मुस्ताफाई रज़ा क़ादरी अमरोहीवी (टी.टी.एस.अमरौहा शाह:07417474441)
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